‘एक विलेन रिटर्न्स’ रिव्यू: कमजोर कहानी से लेकर परफॉर्मेंस, हर तरह से निराश करती है कि ये एक्शन थ्रिलर

कहानी

एक विलेन रिटर्न्स दो पुरुषों की एकतरफा प्यार की कहानी है। वे अपनी प्रेम कहानियों को पूरा करने के लिए जो रास्ते चुनते हैं, इससे वो तय करते हैं कि हीरो कौन है और विलेन कौन! राकेश महाडकर (रितेश देशमुख) के आतंक को खत्म करने के 8 साल बाद मुंबई में एक और सीरियल किलर का जन्म होता है, जो और भी ज्यादा क्रूर और खतरनाक है। ये विलेन भी उसी मास्क के पीछे अपना चेहरा छुपाता है। जैसा कि एक अफसर कहते हैं, “ये विलेन एकतरफा आशिकों का मसीहा बनना चाहता है..” ये उन लड़कियों की कत्ल करता है, जो लड़कों के प्यार को ठुकरा देती हैं।

गौतम मेहरा (अर्जुन कपूर) एक रईस घराने का बेटा है। वह क्रूर है और उसकी जिंदगी का एकमात्र उद्देश्य है कि “मरना है पर हरना नहीं है” .. ऐसे में उसकी मुलाकात होती है आरवी मल्होत्रा से, जो कि एक सिंगर है। दोनों के बीच कुछ मुलाकातें होती हैं और फिर प्यार हो जाता है। लेकिन जल्द ही आरवी की जिंदगी में तूफान आ जाता है, जब गौतम उसे धोखा देकर छोड़ जाता है। वहीं, दूसरी कहानी चलती है भैरव (जॉन अब्राहम) और (रसिका) की। कैब ड्राइवर भैरव को पहली नजर में ही रसिका से प्यार हो जाता है। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं, लेकिन जल्द ही भैरव को अहसास हो जाता है कि रसिका उसे धोखा दे रही है। वो टूट जाता है। एक समय आता है चारों किरदार एक दूसरे से जुड़ते हैं, लेकिन यहां कौन विलेन है, किसकी मौत होती है और कौन जिंदा बचता है, इसी के इर्द गिर्द घूमती है पूरी कहानी।

अभिनय

अभिनय

गौतम के किरदार में अर्जुन कपूर चारों कलाकारों की तुलना में बेहतर लगे हैं। निर्देशक ने उन्हें एक स्टाइल, एक स्वैग दिया है, जिसे एक्टर ने पूरी फिल्म बरकरार रखा है। इमोशनल सीन्स में अर्जुन कमजोर पड़ते हैं, लेकिन जॉन अब्राहम के साथ उनके एक्शन सीक्वेंस ध्यान आकर्षित करते हैं। तारा और अर्जुन की कैमिस्ट्री निराश करती है। रसिका के किरदार में दिशा पटानी को निर्देशक ने अच्छा आर्क दिया है। दिशा किरदार के साथ न्याय करने की कोशिश करती हैं, लेकिन अभी उन्हें अपने एक्सप्रेशंस पर काफी काम करने की जरूरत है। और यही बात लागू होती है जॉन अब्राहम पर। एक्शन सीक्वेंस छोड़कर पूरी फिल्म में जॉन चेहरे से सपाट दिखे हैं। जेडी चक्रवर्ती, शाद रंधावा जैसे सहायक कलाकारों ने अच्छा काम किया है, लेकिन उन्हें काफी सीमित स्क्रीन टाइम दिया गया।

निर्देशन

निर्देशन

फिल्म का निर्देशन करने के साथ साथ इसकी पटकथा को भी मोहित सूरी ने ही लिखा है। एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है ऐसी कहानी जो दर्शकों को लगातार बांध कर रख सके और आगे के लिए उत्सुक करे। लेकिन इस फिल्म की पटकथा इतनी कमजोर है कि शुरुआती कुछ मिनटों में ही ऊबाऊ लगने लगती है। हर किरदार को ट्विस्ट देने के चक्कर में सभी घालमेल लगते हैं। साथ ही फिल्म जिस तरह से हिंसा और हत्याओं को दिखाती है, वह काफी सवालिया है। प्यार को अपने सबसे बड़े हथियार के रूप में इस्तेमाल करने से किसी को मारने का एकमात्र मकसद कैसे मिल जाता है! फिल्म में दिशा का किरदार कहता है, “सेल्फ डिफेंस में सब अलाउड है, हाथ तोड़ने वाले का भी और दिल तोड़ने वाले का भी..”

तकनीकी पक्ष

तकनीकी पक्ष

फिल्म की एडिटिंग की है देवेंद्र मुर्देश्वर ने, जो कि औसत है। फिल्म की कहानी लगातार कुछ महीनों के अंतर पर चलती है। यह पैटर्न काफी दिलचस्प भी होता है, लेकिन लगातार कहानी का आज और बीते कल में जंप करना.. कहानी से ध्यान भंग करता है। एक्शन कोरियोग्राफी अच्छी की गई है। वहीं, विकास शिवरमन की सिनेमेटोग्राफी भी औसत है।

संगीत

संगीत

फिल्म के गाने अंकित तिवारी, तनिष्क बागची और कौशिक-गुड्डू द्वारा रचित हैं। गाने के बोल मनोज मुंतशिर, कुणाल वर्मा, तनिष्क बागची और प्रिंस दुबे ने लिखे हैं। फिल्म का स्कोर राजू सिंह ने तैयार किया है। बहरहाल, एक समय था जब मोहित सूरी की फिल्मों के गाने सालों चर्चा में रहते थे.. लेकिन एक विलेन रिटर्न्स बिल्कुल निराश करती है। ‘गलियां’ जो कि पुरानी फिल्म से ही लिया गया है, वही छाप छोड़ता है। बाकी गाने कहानी को बढ़ाने के अलावा कोई प्रभाव नहीं छोड़ते।

रेटिंग

रेटिंग

यदि आप एक्शन सस्पेंस थ्रिलर शैली पसंद करते हैं, तो ‘एक विलेन रिटर्न्स’ देखने की बजाए, 2014 की ‘एक विलेन’ को दोबारा देखना ज्यादा बेहतर विकल्प होगा। अर्जुन कपूर, जॉन अब्राहम, दिशा पटानी और तारा सुतारिया स्टारर यह फिल्म हर मायने में कमजोर है। फिल्मीबीट की ओर से ‘एक विलेन रिटर्न्स’ को डेढ़ स्टार।

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