‘टोंगा ज्वालामुखी विस्फोट से ओजोन परत को हुआ नुकसान’

Tonga Volcano: उपग्रहों से मिली तस्वीरों को देखने के बाद, शोधकर्ताओं ने पुष्टि की है कि जनवरी 2022 में हंगा टोंगा-हंगा हापई ज्वालामुखी के विस्फोट कोई सामान्य घटना नहीं थी, सबसे बड़ी बात ये है कि विस्फोट के बाद जलवाष्प के बनीं लहरें यानी जो प्लम उठा था वो अब तक का सबसे अधिक ऊंचा प्लम रिकॉर्ड किया गया है. इस विशाल विस्फोट से सीधे तौर पर वायुमंडल के ओजोन परत को नुकसान पहुंचा है और इसे टूटते हुए देखा गया है. ज्वालामुखी का विस्फोट इतना भयावह था कि उसकी आवाज 2300 किलोमीटर तक सुनी गई थी.

15 जनवरी 2022 को, दक्षिणी प्रशांत महासागर में टोंगन द्वीपसमूह में ज्वालामुखी हुंगा टोंगा-हंगा हापई हिंसक रूप से फट गया था. इस विस्फोट को अब तक का सबसे शक्तिशाली विस्फोट के रूप में देखा गया था, जिसने पूरी दुनिया को सदमे में डाल दिया था. इससे इतनी ऊंची लहरें उठीं जिसने विनाशकारी सूनामी ला दिया था. जिससे हजारों लोग बेघर हो गए थे. चारों तरफ राख और पानी की एक विशाल चादर फैल गई थी. लेकिन अब तक, वैज्ञानिकों के पास यह मापने का सटीक तरीका नहीं है कि इससे उठीं लहरें कितनी लंबी थीं 

विस्फोट के बाद लहरों की ऊंचाई मापी गई

आम तौर पर, इन्फ्रारेड-आधारित उपग्रहों द्वारा शीर्ष पर दर्ज तापमान को मापकर ज्वालामुखीय प्लम की ऊंचाई का अनुमान लगाया जा सकता है और इसकी तुलना वैज्ञानिक प्लम के तापमान की लंबाई से करते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि क्षोभमंडल (पृथ्वी के वायुमंडल की पहली और सबसे निचली परत) में ऊंचाई के साथ तापमान कम होता जाता है. लेकिन अगर विस्फोट इतना बड़ा है कि प्लम वायुमंडल की अगली परत (ओजोन लेयर) में प्रवेश कर जाता है, तो यह विधि अस्पष्ट हो जाती है क्योंकि ओजोन परत के सूर्य के पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करने के कारण तापमान फिर से ऊंचाई के साथ बढ़ने लगता है.

News Reels

ज्वालामुखी की लहरों की ऊंचाई मापने के लिए  शोधकर्ताओं ने एक नवीन पद्धति का उपयोग किया, जिससे पता चला कि लहरें धरती के लिए ढाल की तरह काम करने वाली ओजोन परत को छू गई थीं और उसे नुकसान पहुंचाया था. इसका असर आने वाले दिनों में धरती पर वातावरण में आए बदलाव या अत्यधिक गर्मी के रूप में देखा जा सकता है. 

ओजोन परत से भी ऊंची पहुंच गईं थीं लहरें

टोंगा ज्वालामुखी विस्फोट की उपग्रह से  मिली तस्वीरों को देखने से पता चलता है कि  प्लम अपने उच्चतम स्तर पर 57 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच गया था जो यह पिछले रिकॉर्ड की तुलना में काफी अधिक है. इससे पहले फिलीपींस में माउंट पिनातुबो का 1991 का विस्फोट (अपने उच्चतम बिंदु पर 40 किमी), और मैक्सिको में एल चिचोन का 1982 का विस्फोट (31 किमी) का था. इस  विस्फोट से प्लम की ऊंचाई सीधे ओजोन परत तक पहुंच गई थी जो पृथ्वी की सतह से लगभग 50 किमी ऊपर शुरू होता है, जो सात किलोमीटर ज्यादा था.

शोधकर्ताओं ने कही ये बड़ी बात

डॉ साइमन प्राउड (ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, आरएएल स्पेस और नेशनल सेंटर फॉर अर्थ ऑब्जर्वेशन) ने कहा: ‘यह एक असाधारण परिणाम है क्योंकि हमने इससे पहले कभी भी किसी भी प्रकार की ऐसी घटना नहीं देखी है. इसके अलावा, जिस तरह से हमने प्लम ती ऊंचाई का अनुमान लगाने की कोशिश की वह  केवल तभी संभव है जब हमारे पास अच्छा उपग्रह कवरेज हो. एक दशक पहले यह संभव नहीं हो सकता है.’

ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ता अब आगे विज्ञान के उन प्रश्नों को समझना चाहते हैं जो हैं  हैं: टोंगा प्लम इतना ऊंचा क्यों गया? इस विस्फोट के जलवायु प्रभाव क्या होंगे? और वास्तव में प्लम किससे बना था?’ 

यह भी पढ़ें-

Global Warming: पिछले 8 साल रहे सबसे गर्म! समंदर का बढ़ रहा जलस्तर, UN ने बताया क्या है आने वाले सालों में बड़ा खतरा

Source Link

Read in Hindi >>