मुंबई में प्रोड्यूसर के ड्राइवर थे ‘कांतारा’ स्टार रिषभ शेट्टी, मौका नहीं मिला तो लौट गए गांव

कन्नड़ सिनेमा में आज एक बड़ा नाम बन चुके रिषभ शेट्टी की 2018 में आई फिल्म ‘रामन्ना राय’ को ‘बेस्ट चिल्ड्रन्स फिल्म’ का नेशनल अवार्ड मिला था. इससे पहले 2016 की उनकी फिल्म ‘किरिक पार्टी’ को स्टेट अवार्ड मिला था. लेकिन जनता में रिषभ शेट्टी अब जमकर पॉपुलर हो रहे हैं, और वजह है उनकी लेटेस्ट फिल्म ‘कांतारा’. 

कन्नड़ में बनी ‘कांतारा’ को रिषभ ने सिर्फ डायरेक्ट ही नहीं किया है, बल्कि इसके लीड एक्टर भी हैं. फिल्म की तारीफ तो जमकर हो ही रही है, लेकिन फिल्म देखकर लौटा हर व्यक्ति रिषभ की भी तारीफ करता नहीं थक रहा. ‘कांतारा’ मूलतः कन्नड़ फिल्म है और 30 सितंबर को थिएटर्स में रिलीज हुई थी. पिछले 15 दिन से फिल्म जमकर कमाई कर रही है और अपने होम स्टेट कर्नाटक में तो फिल्म की दूसरे हफ्ते की कमाई KGF 2 जैसी ब्लॉकबस्टर से भी बेहतर रही. लेकिन अब बात सिर्फ कन्नड़ की नहीं रही.

‘कांतारा’ का ट्रेलर देखने के बाद से ही हिंदी भाषी जनता भी एक्साइटेड थी और कमेंट्स वगैरह में फिल्म को हिंदी में भी रिलीज करने को कह रही थी. मेकर्स ने जनता की सुनी और 14 अक्टूबर, शुक्रवार को थिएटर्स में हिंदी डबिंग के साथ ‘कांतारा’ रिलीज की गई. पहले दिन ठीकठाक शुरुआत के बाद दूसरे दिन फिल्म की कमाई दोगुनी हो गई और ये नजर आने लगा कि फिल्म का हिंदी वर्जन भी पसंद किया जा रहा है. 

अच्छी हिंदी बोल लेते हैं रिषभ 
‘कांतारा’ की हिंदी रिलीज देखते हुए रिषभ ने भी एक नया इंटरव्यू दिया और इस इंटरव्यू में जो सबसे पहली बात ध्यान खींचती है, वो ये कि उनकी हिंदी भी अच्छी है. इंटरव्यू में रिषभ ने इसके पीछे की वजह भी बताई. और वो वजह अपने आप में विडंबना से कम नहीं है. रिषभ ने बताया कि वो 3-4 महीने फिल्म इंडस्ट्री में ही काम करने के इरादे से मुंबई में भी थे और इसीलिए वो ठीक हिंदी बोल लेते हैं. लेकिन असली कहानी ये है कि रिषभ ने हिंदी में काम क्या किया.

कैसे मिला हिंदी फिल्म में काम  
इस इंटरव्यू में रिषभ ने पूरी कहानी बताई. 2006 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘सायनाइड’ (Cyanide) रिषभ की पहली फिल्म थी, जिसमें उन्होंने बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था. इसके बाद उन्होंने बॉलीवुड फिल्म ‘मर्डर’ के कन्नड़ रीमेक ‘गंडा हेंडथी’ (Ganda Hendathi) से भी जुड़े थे. लेकिन इसके बाद कुछ दिन उनके पास का नहीं था और इसी बीच रिषभ के इलाके में एक हिंदी फिल्म की यूनिट शूट के लिए पहुंची. इस फिल्म पर रिषभ ने लोकल कोऑर्डिनेशन का काम किया.

मुंबई में किया ड्राईवर और ऑफिस बॉय का काम  
फिल्म कम्पेनियन से बात करते हुए उन्होंने बताया, ‘अच्छा आम कर रहा हूं बोलकर मुझे लेकर आए यहां. इधर ऑफिस बॉय का काम, प्रोड्यूसर के ड्राईवर का काम, ये सब किया मैंने. मुझे एडिटिंग का बहुत शौक था, तो उन्होंने बोला कि मैं भेज देता हूं तुझे, वहां अच्छे अच्छे एडिटर हैं, उनके साथ काम करो. 

रिषभ बताते हैं कि ये बात सुनकर वो समझ गए थे कि उनके साथ आगे क्या होने वाला है. उन्होंने आगे बताया, ‘मैं जानता था कि उधर भी ऐसा ही ऑफिस बॉय का काम करना पड़ेगा. वो हर सीनियर एडिटर के साथ जो नया आदमी आता है उसे करना पड़ता है. तो मैंने सोचा करते हैं कोई बात नहीं. मैं देखता रहा कि आगे कुछ नहीं हो रहा है तो फिर बैग उठाकर वापिस गांव चला गया.’ 

अपने गांव में ही बनाई ‘कांतारा’ 
इसी बातचीत में रिषभ ने ये भी बताया कि ‘कांतारा’ का शूट उनके अपने ही गांव में हुआ है. गांव का जो पूरा सेट लगा वो उनके घर से 2 मिनट पैदल चल के पहुंचा जा सकता था. रिषभ पहले कंस्ट्रक्शन का भी काम कर चुके हैं और उनका ये अनुभव फिल्म का सेट क्रिएट करने में भी काम आया. उनके अपने भाइयों और जानने वालों से भी उन्हें इस फिल्म के लिए बहुत मदद मिली.

मुंबई में काम करने गए रिषभ, मौका न मिलने से अपने गांव वापिस लौटे और इसी गांव ने उन्हें ‘कांतारा’ का वो संसार क्रिएट करने में मदद की जिसे स्क्रीन पर देखकर सिनेमा फैन्स की आंखें खुली रह जा रही हैं.

 

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