Gujarat Panchayat Aajtak: जम्मू-कश्मीर में कब चुनाव, कब मिलेगा राज्य का दर्जा? अमित शाह ने समझाई क्रोनोलॉजी

गुजरात चुनाव के सबसे बड़े सियासी मंच पंचायत आजतक पर गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर को लेकर भी विस्तार से बात की है. इस समय कई विपक्षी पार्टियां मांग कर रही हैं कि जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा फिर मिलना चाहिए. अब अमित शाह ने इस प्रक्रिया की पूरी क्रोनोलॉजी समझा दी है.

कब मिलेगा जम्मू-कश्मीर को पूर्व राज्य का दर्जा?

अमित शाह कहते हैं कि जहां तक जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने का सवाल है, हमने स्पष्ट किया है कि सबसे पहले परिसीमन होगा, फिर मतदाता सूची बनेगी और फिर चुनाव होगा. चुानव के बाद ही पूर्ण राज्य पर कोई फैसला निकलेगा. अब ये एक पूरी क्रोनोलॉजी है जिसके बाद जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल सकता है. लेकिन अभी इस प्रक्रिया में कुछ समय जाने वाला है. 

‘कश्मीर में आतंकी घटनाओं में कमी आई’

वैसे जम्मू-कश्मीर को लेकर ही गृह मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया है कि 370 हटने के बाद से आतंकी घटनाओं में काफी कमी आ गई है. टारगेट किलिंग पर भी शाह ने टो टूक कहा है कि पूरी तरह आतंकवाद खत्म होने में समय लगता है. लेकिन जब आंकड़ा 100 से 20 पर आ गया है, ये देखना चाहिए. एक समय लगता है, पहले यहां पर 1990 से 1998 तक कई लोगों की हत्या कर दी जाती थी. लेकिन 370 हटने के बाद इसमें काफी कमी आ गई है.

2024 तक पीएम मोदी की क्या प्राथमिकता? 

जम्मू कश्मीर के अलावा गृह मंत्री की तरफ से दूसरे कई और मुद्दों पर भी विस्तार से बात की गई. जब उनसे पूछा गया कि अब 2024 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी प्राथमिकता क्या रहने वाली है, इस पर उन्होंने एक विस्तृत जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ये देश सुरक्षित होना चाहिए. पीएम मोदी ने इसके लिए काफी काम किया है. उन्होंने इसे सुरक्षित करने का काम किया है. देश की सीमाओं को सुरक्षित करना, सेना का मनोबल बढ़ाना, आतंकवादी हमलों का जवाब सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से दिया है. हम हर मामले में अब विकास कर रहे हैं. कोरोना के बाद अगर कोई अर्थव्यवस्था सबसे तेजी से उभरी है तो वो भारत है. आगे भी इसी दिशा में काम किया जाएगा.

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर क्या स्टैंड?

गृह मंत्री ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भी सरकार और अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट कर दी है. उनका कहना है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर हमने हर घोषणापत्र में जिक्र किया है. ये एक काफी पुराना मुद्दा है. हम मानते हैं कि कानून का आधार धर्म नहीं हो सकता है. अभी राज्य जो लाना चाहते हैं, वो ला सकते हैं, देश में भी बाद में देखेंगे.

गुजरात में मुकाबला किससे?

गुजरात चुानव को लेकर भी अमित शाह की तरफ से दावा कर दिया गया है कि एक बार फिर बड़े बहुमत के साथ बीजेपी की सरकार बनने वाली है. वे तो यहां तक कह रहे हैं कि ये मुकाबला त्रिकोणीय नहीं होने वाला है. वे कहते हैं कि हर बार हम ही चुनाव जीते हैं, 1990 के बाद एक भी चुनाव बीजेपी नहीं हारी. जनता ने हमें ही आशीर्वाद दिया है. ऐसा नहीं है कि त्रिकोणीय मुकाबला पहली बार हो रहा है. जब नतीजे आएंगे तभी पता चलेगा कि ये त्रिकोणीय है या नहीं.

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